जानिए दशानन ने शिव से इसलिए मांगा था पार्वती का स्वर्ण महल

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दोस्तों आज 19 अक्टूबर दशहरा के पावन पर्व है जिसे हम विजयदशमी के नाम से भी जानते हैं विजयादशमी शारदीय नवरात्रि के बाद दशमी के दिन हमारे देश में बहुत ही धूमधाम से मनाया जाता है जिसे हम अच्छाई की बुराई पर विजय’ के नाम से भी जानते हैं | रावण ने राम के वनवास के दौरान माता सीता का हरण किया था भगवान राम ने माता सीता को छुड़ाने के लिए  उन्होंने समुद्र पर पुल बनाकर लंका पर चढ़ाई की थी | लंका में 10 दिन के युद्ध के बाद भगवान राम ने रावण का वध किया था | इसीलिए अच्छाई की बुराई पर विजय हुई तभी से दशमी के दिन आज देशभर में रावण तथा कुंभकर्ण पुतले बनाकर हर साल दहन किया जाता है |

रावण के 10 सिर

रावण ने भगवान शिव की आराधना के दौरान उन्हें प्रसन्न करने के लिए अपने सिर को 10 बार काटा था तथा सिर को भगवान शिव के चरणों में अर्पित किया था भगवान शिव ने रावण रावण की भक्ति से प्रसन्न होकर उसे को 10 सिर होने का आशीर्वाद दिया था इसीलिए रावण को दशानन भी कहा जाता है |

रावण ने मांगा स्वर्ण महल

भारत युगांतर काल से ही ऋषि मुनियों की पावन भूमि रहा है |यहां एक से बढ़कर एक ऋषि मुनियों ने जन्म लिया है हिंदू धर्म ग्रंथ के अनुसार जब माता पार्वती ने भगवान शिव से उनके रहने के लिए घर बनवाने का आग्रह किया था तब भगवान शिव ने विश्वकर्मा को आदेश देकर एक भव्य महल का निर्माण कराया था. भवन में प्रवेश करने के लिए पूजा हवन के लिए उन्होंने ब्रह्मांड के जाने-माने पंडित रावण को आमंत्रित किया था|

जब रावण हवन  के लिए महल के समक्ष पहुंचा तो वह इस स्वर्ण महल को देखकर दंग रह गया | उसने हवन के बाद भगवान शिव से दक्षिणा के रूप में स्वर्ण महल मांग लिया और भगवान शिव ने उसे खुशी से वह स्वर्ण महल भेंट कर दिया कुछ विद्वानों का मानना है कि वह शिव को लंका ले जाने के लिए भगवान शिव को ले जाने आया था उसकी जीभ पर सरस्वती विराजमान होने के कारण इस स्वर्ण महल को मांग बैठा था |

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