अश्विन शारदीय नवरात्र  का पर्व 10 अक्टूबर से हैं प्रारंभ

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हिंदू धर्म ग्रंथों के अनुसार मुख्य रूप से वर्ष में दो बार नवरात्र  के पावन पर्व का आगमन होता है सबसे पहले चैत्र महीने में पड़ता है और फिर दूसरी बार आश्विन महीने में  मनाया जाता है लेकिन इस बार नवरात्र का विशेष पर्व 10 अक्टूबर दिन बुधवार से आरंभ हो रहे हैं 9 दिन चलने वाले इस पावन पर्व में भक्त व्रत उपवास तथा और माता दुर्गा की पूजा-अर्चना करते हैं |

नवरात्र में पूजा के लिए कलश स्थापना का विशेष महत्व होता है तथा दीपक जलाने से भी घर में सुख शांति तथा समृद्धि की वृद्धि होती है यह दीपक आप देसी घी अथवा सरसों के तेल में भी जला सकते हैं आइए जानते हैं कलश भरने के शुभ मुहूर्त क्या है : कलश स्थापना का मंगल मुहूर्त सुबह 6:22 बजे से 7:35 बजे तक तक रहेगा इस मुहूर्त का कुल समय 1 घंटा 3 मिनट है |

शारदीय नवरात्र का पावन पर्व पूरे देश भर में बड़े धूमधाम से मनाया जाने वाला पर्व है इसमें भक्त 9 दिनों तक व्रत रखकर माता दुर्गा के 9 अवतारों की पूजा करते हैं हालांकि कुछ भक्त 9 दिन  न रखकर रखकर वह केवल 2 दिन का ही व्रत रखते हैं नवरात्र के पहले दिन तथा अष्टमी के दिन रहते हैं| इन 9 दिनों में पूजा हवन के बाद नौ कन्याओं को भी भोजन कराया जाता है यह सभी 9 दिन किसी भी कार्य करने के लिए बहुत ही शुभ माने जाते हैं |

कुछ भक्तजन अपने घरों में ही दुर्गा माता की प्रतिमा स्थापित करते हैं तथा दशमी को उन्हें विदाई देते हैं नवरात्र में कुछ लोग भंडारे करते हैं तथा रात में भजन कीर्तन का आयोजन होता है सुबह मंदिरों में आरती तथा घंटियों की ध्वनियां गूंजती हैं नवरात्र के प्रारंभ होने में कुछ ही समय बचा है  चारों तरफ नवरात्रों की तैयारी जोरो से चल रही है |

बता दें कि पश्चिम बंगाल में दुर्गा माता की बड़ी मूर्तियां बनाकर सजाते हैं तथा सभी भक्तजन उनकी आराधना करते हैं वहीं गुजरात में नवरात्रों में डांडिया खेल कर बड़े धूमधाम से इस पर्व को मनाया जाता है |

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